Sunday, April 15, 2012

सत्यमेव जयते


सत्यमेव जयते

तू बोल चल, तू बोल चल
सत्य वचन तू बोल चल
सच में ही है वीरता 
सच में ही सुकून है
सच में ही है धैर्यता 
सच में ही संयम है 
सच बोलना है आसान 
सच बोलना कठिन भी है 
सत्यमेव, सत्यमेव जयते

हम तो  है चल पड़े 
मंजिल का न कोई अता पता 
यह जो रास्ते  के हैं  किस्से 
बातें करीं जो अपने आप से
देख लिया, खोज लिया, 
घूम घूम के अब समझ लिया
हर यात्रा का अंत तो अपने घर में है  
सच्चे राही की मंजिल इसी में है 
सत्यमेव, सत्यमेव जयते

जहाँ जहाँ भी हम गए 
अजूबे शहरों में जम गए 
अजनबियों से जुड़ गए 
सत्य वाणी में हैं कुछ ऐसी मिठास 
मामूली भी बने है ख़ास 
सत्यमेव, सत्यमेव जयते

आगे आगे बढे हैं हम
तकदीर अपनी  लिखे हैं हम 
करियर में, व्यवसाय में, समाज में
ज़िन्दगी की भागम - भाग  में 
सर हमारा हमेशा ऊपर रहा 
सच जो हमारा हमसफ़र रहा 
सत्यमेव, सत्यमेव जयते

अपने से पहले दूसरों के लिए जब सोचे हैं आप
दूसरों की सेवा में जब तत्पर रहे आप 
दिल से जब आप करे प्रणाम
माता पिता का जब करो सम्मान
छोटे छोटे कर्मों में है सच 
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी में है सच 
सत्यमेव, सत्यमेव जयते

कहाँ खो गयी है तेरी मुसकुराहट
कहाँ चला गया है तेरा चैन 
देख अपने अन्दर आखिर क्या है गढ़ा
पायेगा तू वो एक झूठ है काफी भारी पढ़ा 
अरे खुद को तू अब पहचान ले 
दो बात तू मेरी अब मान ले 
सच ही तेरा खुदा, सच ही तेरा मीत है 
असत्य में होनी है हार और सच में ही जीत है 
सत्यमेव, सत्यमेव जयते

No comments: